साल 2050 की गर्मियां प्रचंड आवेग में थी. धरती से बड़ी संख्या में जीव-जंतु-मनुष्य स्वर्ग पहुंच रहे थे. उधर स्वर्ग में पूरा मामला सेंट्रलाइज्ड एयर कडीशन्ड था. गजब की शीतलता चारों तरफ फैली हुई थी. सनातन चाय वाले की टपरी धीरे-धीरे वहां मशहूर हो चुकी थी. हर दिन नेता पनेता टपरी पर जुटते, देश समाज की चर्चा होती, कभी कभी बकझक भी हो जाती थी.
आज चायवाले ने सबेरे सबेरे ही कोयले की भट्टी सुलगा रखी थी. शुरुआती ग्राहकों में आज नेहरू अपनी बेटी इंदिरा के साथ सबेरे की सैर करते हुए पहुंचे थे. अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के साथ जय प्रकाश भी टपरी पर आए.
इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह सामने की बेंच पर बैठ गए मगर नेहरू पीछे एक कोने में रखे लकड़ी के स्टूल पर चुपचाप सेटल हो गए. नेहरू के चेहरे पर एक गरिमापूर्ण ख़ामोशी थी. उन्हें दूर चुपचाप बैठा देख चायवाले को मौज लेने की सूझी.
आगे क्या हुआ जानने के लिए देखिए इस हफ्ते की ये खास टिप्पणी.
Newslaundry is a reader-supported, ad-free, independent news outlet based out of New Delhi. Support their journalism, here.